हाँ मैं मुसलमान हूं - Including Controversial Lines

सिवाए हराम चीज के
मैं कुछ भी कर सकता हूं
क्योंकि मैं मुसलमान हूं
जी सकता जीने भी दे सकता हूं

(खून मिला हुआ हैं मिट्टी में)

वतन मेरे बाप-दादा का
अपना हक मांग भी सकता हूं
दूसरो के खातिर हक्कानीयत
आवाज़ उठा भी सकता हूं

(मिसाल ए इंसानियत हैं इस्लाम)

कल भी इस्लाम था आज भी
अगर कहे कोई जुल्म-सितम
समझा भी सकता हूं 
माफ़ भी कर सकता हूं

(शरीयत का अगर हो कोई दुश्मन)

जो कुछ भी हो दायरे इस्लाम
मैं सब कर सकता हूं
मर भी सकता हूं
किसीको मार भी सकता हूं

(अल्लाह ही की ताक़त काफ़ी हैं)

कोई नहीं रोक सकता
फरेबी बादशाह हो या कोई फिरोन
अल्लाह की कसम अगर वो
गुस्ताख़ हो तो काट भी सकता हूं

अल्लाह से बड़ी कोई ताक़त नहीं
यह सब जानते हैं सब मानते हैं
किसका न मानना अल्लाह की मर्जी
अबाबिल से जंग हाथियो की हार
दरिया का सूखना मच्छर से मौत
अल्लाह से डरना ही इबादत हैं
न डरनेवाला लश्करे दोजख का
सीप ए सालार कहूं या खबिश
खैर देर रात तक नींद नहीं आ रहीं थी
इसलिए सोचा कुछ हक बात
अल्लाह मुझे हक बोलने और 
आपको हक सुनने की
तौफीक अता'अ फरमाए
मैं अभी बीमार हूं फिलहाल ठीक हूं
अल्हमदुलिल्लाह लाखों मर्तबा 
दुआ कीजिए जल्द ठीक हो जाऊ
अल्लाह आपको सलामत रखें - æhesan

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